मिथिला — बिहार के सुपौल में पारंपरिक लोक कला एवं गायन परंपरा भगैत के संरक्षण को लेकर गहन मंथन किया गया। इस दौरान क्षेत्र की इस सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाए रखने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ।
मंथन के दौरान भगैत के संरक्षण की दिशा में प्रयास तेज करने की बात कही गई। इसके साथ ही इस लोक विधा को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई, ताकि युवाओं और विद्यार्थियों को अपनी इस लोक धरोहर के बारे में विधिवत जानकारी मिल सके।
सुपौल में आयोजित इस परिचर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि भगैत को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर ही इस परंपरा को सशक्त पहचान और निरंतरता दी जा सकती है। लोक संस्कृति के संवर्धन के लिए इसके संरक्षण को आवश्यक कदम बताया गया।
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