दरभंगा — बिहार में संस्कृत शिक्षा को आधुनिक और समृद्ध बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर दरभंगा जिला संस्कृत सह माध्यमिक शिक्षक संघ द्वारा आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों के वेतन, पेंशन और विद्यालयों के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 35 शिक्षकों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मंच पर उपस्थित प्रमुख हस्तियां इस विशेष आयोजन में शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंच पर मुख्य रूप से: . अरूण झा (माननीय सदस्य, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड) . डॉ० अनिल कुमार ईश्वर (प्रसिद्ध शिक्षाविद) . प्रो० विजय मिश्रा . प्रो० भवेशवर सिंह . सी.ए. आदित्य झा
संस्कृत शिक्षा बोर्ड की प्रमुख उपलब्धियां और भविष्य का रोडमैप
पत्रकारों से बातचीत के दौरान बोर्ड अध्यक्ष मृत्युंजय झा ने नियोजित व नियमित शिक्षकों के वेतन और पेंशन के मुद्दों को राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के समक्ष मजबूती से उठाने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही उन्होंने बोर्ड की हालिया उपलब्धियों और आगामी योजनाओं को साझा किया: रिकॉर्ड समय में परिणाम: बोर्ड ने महज 27 दिनों के भीतर 87% रिजल्ट जारी कर नया रिकॉर्ड बनाया है और सप्लीमेंट्री परीक्षा की भी शुरुआत की है।
डिजिटल पहल: बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट (bsseb.bihar.gov.in) लॉन्च कर दी गई है, जहां छात्रों के लिए ऑनलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध होगी।
27 साल बाद पाठ्यक्रम में बदलाव: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत 27 वर्षों बाद पाठ्यक्रम में सुधार किया गया है। अब इसमें कर्मकांड, ज्योतिष और आयुर्वेद जैसे व्यावहारिक विषयों को शामिल किया गया है।
50 मॉडल 10+2 विद्यालय: प्रदेश के 50 संस्कृत विद्यालयों को मॉडल 10+2 स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए केंद्र सरकार को प्रति विद्यालय ₹2 करोड़ का बजट प्रस्ताव भेजा गया है।
शिक्षकों और शिक्षाविदों में उत्साह
बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की इस नई पहल, आधुनिक पाठ्यक्रम के समावेश और शिक्षकों के सम्मान से पूरे क्षेत्र के अध्यापकों और शिक्षाविदों में भारी उत्साह और खुशी का माहौल है।


