मिथिला — केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि अस्पतालों द्वारा मरीजों से अत्यधिक पैसे वसूलना एक अनुचित प्रथा है। सभी दवाओं और मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतें सीमित करने के मुद्दे पर रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दाखिल किया है। मंत्रालय ने कहा कि अस्पतालों के मुकाबले मरीजों के पास मोलभाव करने की बहुत कम गुंजाइश होती है, जिसके परिणामस्वरूप कई तरह के अनुचित व्यवहार और गड़बड़ियां पैदा होती हैं।

हलफनामे में इस विरोधाभास का भी जिक्र किया गया कि भारत सस्ती दवाएं बनाने वाली कंपनियों का गढ़ है, लेकिन फिर भी यहां के मरीजों को दवाओं की उत्पादन लागत से कहीं अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। इसके अलावा मरीजों को अस्पतालों द्वारा की जाने वाली अत्यधिक वसूली का भी सामना करना पड़ता है। सरकार ने अदालत के समक्ष यह पक्ष दवाओं और संबंधित सामग्रियों की कीमतों को नियंत्रित करने के संदर्भ में रखा है।

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