मिथिला — कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) और राज्य के परिवहन अधिकारियों को कड़ा रुख अपनाते हुए कड़ी फटकार लगाई है। यह पूरा मामला उम्मीदवारों को ऐसे भारी वाहनों की मरम्मत का प्रशिक्षण दिए जाने से जुड़े फर्जी प्रमाणपत्रों से संबंधित है, जिनका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नहीं है।
अदालत ने मामले में पाया कि KSRTC और BMTC ने अपने जारी किए गए प्रमाणपत्रों में सरासर झूठ बोला है। इन संस्थाओं ने प्रमाणपत्रों में यह प्रमाणित किया था कि कुछ उम्मीदवारों ने पेट्रोल इंजन से चलने वाले भारी मालवाहक वाहनों (HGV) और भारी यात्री वाहनों (HPV) की मरम्मत का प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
उच्च न्यायालय ने इस बात को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि पेट्रोल इंजन वाले ऐसे भारी वाहन अस्तित्व में ही नहीं हैं। इसके बावजूद गैर-मौजूद वाहनों पर प्रशिक्षण के गलत और भ्रामक प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिसको लेकर अदालत ने संबंधित परिवहन प्राधिकरणों और KPSC की कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताया है।
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