मिथिला — केरल उच्च न्यायालय ने सीएमआरएल 'रिश्वत' मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की एक रिपोर्ट के आधार पर विजयन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली याचिका को अनुमति दे दी है। अदालत के इस फैसले से मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
यह याचिका अधिवक्ता के एम शाजहान द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने अपनी अर्जी में अदालत के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया था कि संबंधित आरोपों पर पुलिस को केवल प्रारंभिक जांच करने के बजाय सीधे तौर पर एक विधिवत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करनी चाहिए।
याचिकाकर्ता का मुख्य जोर इस बात पर था कि प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों और लगाए गए आरोपों के मद्देनजर प्रारंभिक जांच की जगह नियमित आपराधिक मामला दर्ज किया जाना आवश्यक है। उच्च न्यायालय ने इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए इस याचिका को स्वीकार कर लिया है।
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