मिथिला — पूर्व न्यायाधीश के. चंद्रू ने न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं और इसमें पारदर्शिता की कमी की आलोचना की है। पूर्व जज का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम द्वारा नहीं, बल्कि मोदी द्वारा की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह तर्क भी दिया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को फिर कभी पुनर्जीवित नहीं किया गया।

न्यायिक विषयों पर आयोजित चर्चा के दौरान जस्टिस एस. मुरलीधर ने सुप्रीम कोर्ट में महिला न्यायाधीशों को पदोन्नत किए जाने की कमी का मुद्दा उठाया। इसके अलावा, राजू रामचंद्रन और जस्टिस के. कन्नन ने भी इस विमर्श में भाग लिया और संबंधित महत्वपूर्ण न्यायिक विषयों पर अपने विचार साझा करते हुए चर्चा में अपना योगदान दिया।

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