मिथिला — सोशल इम्पैक्ट समिट के दौरान इस बात पर विस्तार से चर्चा की गई कि भारत में शिक्षा के अंतर को पाटने के लिए तकनीक का किस तरह प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। चर्चा में यह बात सामने आई कि यदि प्रौद्योगिकी को व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप ढाला जाए, तो यह शिक्षा की खाई को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि कोई भी तकनीक शिक्षकों की जगह नहीं ले सकती है।
भारत में शिक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अब एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। सामाजिक प्रभाव से जुड़े इस मंच पर शिक्षा के अलावा बाजार और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पर भी बातचीत हुई। इसमें यह पहलू भी सामने आया कि दलाल स्ट्रीट पर सीएसआर की मौजूदगी के बीच बाजार सामाजिक प्रभाव को किस तरह और कितना समझ पा रहे हैं।
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यह रिपोर्ट Mithila live 24 न्यूज़ डेस्क ने The Economic Times की रिपोर्टिंग के आधार पर तैयार की है।



