मिथिला — भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साढ़े तीन साल बाद नीतिगत रेपो रेट में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक के इस कदम के बाद अब यह सवाल सामने आ रहा है कि रेपो रेट में हुई इस वृद्धि का असर आम लोगों की जेब पर किस तरह पड़ेगा। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या रेपो दर बढ़ने से बैंक लोन की ईएमआई अपने आप बढ़ जाएगी या इसमें अन्य वित्तीय पहलू भी शामिल होंगे।

कर्ज लेने वाले ग्राहकों के सामने यह विकल्प भी विचारणीय है कि उनके लिए ईएमआई की राशि में बढ़ोतरी कराना अधिक फायदेमंद रहेगा या फिर लोन की समय सीमा यानी टेन्योर को बढ़वाना सही होगा। इसके अलावा, रिजर्व बैंक का यह फैसला उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने की योजना बना रहे हैं और यह जानना चाहते हैं कि इस बढ़ोतरी से उनके निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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