मिथिला — गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह कहा है कि ‘तलाक-ए-हसन’ तलाक का एक वैध रूप है। उच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से मान्य ठहराते हुए अपना फैसला सुनाया है। अदालत के इस निर्णय के माध्यम से ‘तलाक-ए-हसन’ के जरिए दिए गए तलाक की वैधता को स्पष्ट किया गया है।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता को भी एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया। गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को आदेश दिया है कि वह अपने इस तलाक को ‘असम अनिवार्य मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 2024’ के तहत विधिवत पंजीकृत कराए।

अदालत के इस निर्देश के बाद याचिकाकर्ता को राज्य के इस संबंधित कानून के तहत अपने तलाक का आधिकारिक पंजीकरण कराना होगा। अदालत ने इस प्रक्रिया के माध्यम से तलाक के औपचारिक और वैधानिक पंजीकरण पर जोर दिया है, ताकि अधिनियम के तय नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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