मिथिला — झीरम घाटी में हुए भीषण माओवादी हमले के मामले में 13 वर्षों के बाद फैसला सामने आया है, हालांकि घटना से जुड़े कई बुनियादी सवाल अब भी बने हुए हैं। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ था जब कांग्रेस नेताओं को लेकर जा रहा वाहनों का एक काफिला वहां से गुजर रहा था।

एनआईए के विवरण के मुताबिक, यह काफिला एक राजनीतिक अभियान 'परिवर्तन यात्रा' का हिस्सा था, जिसमें लगभग 20 वाहन शामिल थे। इस यात्रा पर प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सदस्यों द्वारा हमला किया गया था।

जांच के अनुसार, माओवादियों ने सबसे पहले एक लैंडमाइन विस्फोट किया था। इस जोरदार धमाके के प्रभाव से परिवर्तन यात्रा के वाहनों का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया था। इस मामले में 13 साल के लंबे अंतराल के बाद फैसला आने के बावजूद वही पुराने सवाल आज भी अनसुलझे खड़े हैं।

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