मिथिला — इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत की गई हिरासत को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने उन्हें मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने गौतमबुद्ध नगर प्रशासन द्वारा मामले में अपर्याप्त साक्ष्य पेश करने पर कड़ी आपत्ति जताई।
न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों और नौकरशाहों को राजनीतिक निष्ठा से ऊपर उठकर अपने संवैधानिक दायित्वों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अदालत ने रेखांकित किया कि आकृति चौधरी द्वारा किसी भी प्रकार की हिंसा भड़काने का कोई सबूत रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं था।
उच्च न्यायालय का यह फैसला कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने वाले निवारक हिरासत कानूनों के दुरुपयोग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण चेतावनी माना जा रहा है। अदालत ने आधिकारिक ज्यादतियों पर टिप्पणी करते हुए आगाह किया कि प्रशासन द्वारा की जाने वाली ऐसी मनमानी व्यवस्था के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है।
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