मिथिला — आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को जानकारी दी है कि जनगणना नगर के निर्धारण का चार दशक पुराना पैमाना भारत के वास्तविक शहरीकरण का सही आकलन करने में असमर्थ है। मंत्रालय के अनुसार, यह पुरानी व्यवस्था देश के वर्तमान शहरी विस्तार को पूरी तरह से दर्ज नहीं कर पाती है।

मंत्रालय ने समिति के समक्ष स्पष्ट किया कि चार दशक पुरानी यह परिभाषा देश में आए आर्थिक बदलावों, क्षेत्रीय विविधता और शहरों से सटे उप-शहरी या पेरी-अर्बन क्षेत्रों में हो रहे विकास को नजरअंदाज करती है। इस कारण जमीनी स्तर पर शहरीकरण की वास्तविक वृद्धि का सही ब्योरा सामने नहीं आ पाता है।

इस मामले पर संसदीय समिति ने शहरीकरण के भविष्य के नए मानदंड तय करने के लिए व्यापक विचार-विमर्श करने का आह्वान किया है। समिति ने जोर दिया है कि आगे के सटीक मानक तय करने के लिए विस्तृत परामर्श प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

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