मिथिला — भारत की हरित ढाल के रूप में पहचानी जाने वाली भारतीय वन सेवा ने अपनी यात्रा के 60 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही यह सेवा अपनी हीरक जयंती मना रही है। देश के वन क्षेत्रों और पर्यावरण की रक्षा में इस सेवा का योगदान बेहद अहम रहा है।

वन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कॉर्बेट का सफर भी प्रेरणादायी रहा है। कॉर्बेट आदमखोरों के शिकारी से बदलकर वन्यजीवों के संरक्षक और समर्थक बने थे। उन्होंने वर्ष 1936 में भारत के पहले राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की थी।

वर्ष 1936 में देश के पहले राष्ट्रीय उद्यान की नींव पड़ने के समय से लेकर भारतीय वन सेवा के 60 वर्षों के सफर तक, भारत में प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण का कार्य लगातार जारी है।

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